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लूट का अड्डा बने निजी स्कूलें, वर्तमान स्थिति और उपाय

आजकल शिक्षा, शिक्षा ना रहकर बिजनेस हो गया है और स्कूल दुकाने बन गई है ! सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन को ठेंगा दिखाते हुये, निजी स्कूल ना केवल एडमिशन के समय डोनेशन के रूप में अभीभावको से मोटी रकम वसूल रहे है बल्कि स्वनिर्मित तरह तरह के फीस लगाकर भी लूट मचा रखे है ! निजी स्कूलों  के अन्दर कॉपी किताब, ड्रेस और स्टेशनरी के सामान बिकना आम बात हो गई है जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है ! सरकार की अनदेखी और बेतुके नियमों की वजह से सरकारी स्कूल और सरकारी अस्पतालों की हालत दिनोदिन ख़राब होते जा रही है, जिसका फायदा ये निजी स्कूल और निजी अस्पताल बखूबी उठा रहे है ! बड़े बड़े नेताओं के और उनके रिश्तेदारों के निजी स्कूल और निजी अस्पताल चल रहे है जिनको अप्रत्यक्ष रूप से फायदा दिलाने के लिए ही सरकारी स्कूल और अस्पतालों की स्थिति को जानबूझकर खराब किया जा रहा है ! सरकारी स्कूल के शिक्षकों का पढाई के अतिरिक्त अन्य कामों में बहुतायात रूप से उपयोग में लाया जा रहा है जिसका खामियाज़ा वहां के बच्चों को भुगतना पड़ता है ! भ्रष्टाचार के कारण हालात इस तरह से बना दिया जाता है कि किसी स्कूल में आवश्यकता से अधिक शिक्षकों को नियुक्त कर दिया जाता है और कही तो पुरे स्कूल को एक शिक्षक सम्हाल रहे होते है ! फिलहाल तो इसका एक ही इलाज़ हमको समझ आ रहा है कि क्यों ना सभी नेताओं और सभी अधिकारीयों के बच्चों का सरकारी स्कूल में पढ़ना अनिवार्य कर दिया जाय और साथ ही इनका स्वयं का एवं इनके परिवार के सदस्यों का सरकारी अस्पतालों में इलाज़ कराना अनिवार्य कर दिया जाय ! फिर ये नेता और अधिकारी सरकारी स्कूल और सरकारी अस्पतालों को गंभीरता से लेंगे और बहुत जल्द ही इनके हालात में सुधार आएगा ! अगर आप भी हमारे विचारों से सहमत है तो इस पोस्ट को शेयर जरुर करे ताकि हमारे दिए गए टैक्स के पैसों का सही इस्तेमाल होना शुरू हो ! हमने एक विडियो भी तैयार किया है जो की नीचे उपलब्ध है उसको भी जरुर देखे और शेयर करे !